खजाना मस्ती

जब हों अकेले और उदास कर लें थोड़ी मस्ती से मुलाकात

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सिनेमा की दुनिया में कदम रखते ही कदम रखते ही लोग चर्चा में आ ही जाते हैं। अक्‍सर देखा जाता है कि परिवार का कोई न कोई सदस्‍य सिनेमा में कार्यरत रहता ही है। कपूर खानदान की पीढि़यां दर पीढि़यां फिल्‍मों में काम कर रही हैं। मेरी जानकारी के अनुसार अधिकतर शादियां फिल्‍मों में काम करते करते तय हो जाती हैं। जब दो जवां दिल किसी फिल्‍म में काम करते हैं तो महीनों महीनों तक एक साथ उठना बैठना जारी रहता है। ऐसे में जब दो जवां दिल मिलते हैं तो कुछ न कुछ होता ही है। कभी लड़कियां तो लड़के एकदूसरे के पीछे भागते हैं। सुंदर चेहरे के प्रति आकर्षण होता ही है। एक बात यह भी है कि जब उम्र बढ़ती है तो शादी का तकाजा होता ही है। ऐसे में रणबीर वैसे भी दिलफेंक हैं ही तो उनके पीछे नायिकाओं का भागना लाजिमी है। कईयों का दिल तोड़ने वाले रणबीर कपूर आगे का क्‍या करनेवाले हैं-- यह तो समय ही बतायेगा। फिलहाल कटरीना कैफ पर उनका मन लगा है। मेरा तो मानना है कटरीना के साथ उनको शादी कर ही लेना चाहिए।

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उत्तराखंड परिवहन निगम की पिथौरागढ़ की बसों की दुर्दशा : मुझे पिथौरागढ़ से दिल्ली आना था , पिथौरागढ़ बस स्टेशन के सामने घंटो रुकने के बाद मुझे एक गाडी मिली , जो राजधानी एक्सप्रेस कही जाती है पर उस गाडी की दशा कुछ इस तरह थी. गाडी में सीट की हालत इतनी ख़राब थी की बैठने लायक नहीं थी , धुल इतनी की हाथ रखने पर ही हाथो में मिट्टी लग जाए ,गाडी के शीशे में गंदे निशान , लोगों के उलटी के गंदे निशान, गाडी के बैक साइड में शीशे की जगह टिन का पट्टा, हाई-टेक कही जाने वाली ये बस हाई-टेक सीट्स और पंखो के लिए एक्स्ट्रा चार्ज लेती है लेकिन ना ही उसमे पंखे चले और ना ही सीट्स अपनी जगह से हिली हालाँकि उसमे स्विच और वायर्स लगे थे जो अस्त व्यस्त हालत मे थे, अब आई कंडक्टर की बारी उसने टिकट काटे और छुट्टे पैसे वापिस नहीं किये , ये हमेशा की बात है दिल्ली जाने वाली गाडी में कंडक्टर आधे रस्ते में बदल जाते है और दूसरे कंडक्टर से आप वो छुट्टे मांग नहीं सकते , क्योकि वो उसका काम नई ऐसा कहके वो यात्री को टाल देगा उसी से लेना पड़ेगा चाहे वो कितने भी हो , १ रूपये से ५०० या उससे अधिक ,कंडक्टर चलती गाडी में लोगो से एक बार छुट्टा लेने को कहेगा जब आधे से अधिक लोग सो रहे होंगे इस तरह कुछ लोगो के पैसे तो वैसे ही छूट जायेंगे और उसके बाद वो कहेगा की दूसरा कंडक्टर पैसे वापिस नहीं करेगा, इसके बाद ड्राइवर की बारी , ड्राइवर जहाँ मर्जी वह गाडी रूकाता है ,कितना भी समय और गाडी रोकने के बाद ये भी नई कहेगा की गाडी कितने देर रुकेगी, यह अनुभव मैंने दिल्ली से आते समय बस में लिया टनकपुर से ड्राइवर बदल गया और उसने गाडी इतनी जगह रोकी की कुछ पता ही नई चले , कही पर तेल भरना है करके कही , कही लोहाघाट में इनके डिपो में रुक जायेंगे जिसका टाइम ये कितना भी लेंगे ये कोई नहीं बतायेगा। और परिवहन निगम द्वारा अनुबंधित ढाबो का क्या कहना , भोजनालय में कोई भी भोजन की कोई विशेषता नहीं बस वो लोगो को बेचना है इस उद्देश्य से वो चलाते है इस विषय पर कम्प्लेन तो कई लोग कर चुके है पर कुछ हुआ नहीं अभी तक। एक बार दिल्ली से आते समय आनंद विहार आई एस बी टी पर एक आदमी से मैंने यह पूछा की पिथौरागढ़ की बसें कहा मिलेंगी तो उसने कहा " वहाँ पर जाओ जो सबसे गन्दी बसें दिखेंगी वो पिथौरागढ़ की होंगी " मेरी उत्तराखंड परिवहन निगम के उच्च-अधिकारियो से यह विनती है की पिथौरागढ़ से दिल्ली रूट की बसो की दशा सुधारें और ड्राइवर- कंडक्टर को हिदायत दे की वो यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा का भी ख्याल रखें जो वो कर सकते हैं। लक्ष्मण , टकाडी

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के द्वारा: Gopesh Shukla Gopesh Shukla

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एस एन बनर्जी साहब.. पहला तो यह कि जो आपने यह कमेंट किया है वह जागरण जंक्शन वालों ने हटाया क्यूं नहीं सॅमझ नहीं आया क्यूं कि मियां उपरोक्त आर्टिक्ल शायद रांझना फिल्म का है और आपका कमेंट राम-रावण पर बेसड है.. दूसरा यह कि हो सकता है आप फर्जी नाम से यह कमेंट कर रहे हो. तीसरा.. आपके छोटे से दिमाग को बड़ी मरमम्त की जरूरत है.. श्री राम और रावण में समानताएं तो अवश्य दिखाई जा सकता हैं लेकिन यह कहना कि राम की भर्त्सना होनी चाहिए बिलकुल गलता है.. यह तो हमारा हिन्दू समाज है जो तथाकथित जीओ और जीनो दो की धारणा की वजह से आप जैसे लोगों क़ॉ कुछ भी लिखने की आजादी देता है.. यही शब्द अल्लाह, अकबर या किसी अन्य संप्रदाय के लिए इस्तेमाल कर के देखें.... जंक्शन वाले इस कमेंट को रख कर आखिर साबित क्या करना चाहते हैं????

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लोगो को लताजी के गाने काफी हाड तक पसंद है और वो स्वयम विश्व विख्यात हैं...लोगों का काम ही होता है कहना और फिर अगर वो किसी प्रसिद्ध कवी या गायिका की बात हो तब तो चर्चे अख़बार के पहले पृष्ठ पर देखे जा सकते हैं.लताजी को 'निघ्तिंगले ऑफ़ इंडिया' के ख़िताब से नवाज़ा जा चूका है और इस उम्र में भी वो आज की नयी नवेली गायिका के रूप में प्रस्तुत होती हैं..कोई भी शख्स इस बात से नकार नहीं सकता है की उनके आवाज़ का जादू विदेश तक में प्रसिद्ध है.हर इंसान के ज़िन्दगी में काफी रहस्य होते हैं और ये ज़ाहिर सी बात है की वो उन्हें स्वयम में संभल कर रखना चाहते हैं...लोगो के सामने अपनी ही ज़िन्दगी की नुमाइश कौन करता है भला....जो हो गया सो हो गया.....लताजी फिर भी करोरो की मात्र में लोगो के दिल में राज करती थी,करती हैं और करती रहेंगी

के द्वारा: #Shalini singh #Shalini singh

प्रिय जागरण जंक्शन ब्लॉग , जंक्शन ब्लॉग्स की अपडेत के बाद एक पाठक और ब्लॉग लेखक के रूप में आ रही कठिनाइयों से ,लगातार मेल पत्रों में आपको रूबरू कराने के बावजूद आपकी तरफ़ से न कोई प्रतिक्रिया या संवाद का स्थापित न हो पाना दुखदायी लग रहा है । ब्लॉग प्रकाशित होने के बावजूद स्ट्रीम में न दिखाई देना , डैशबोर्ड में टिप्पणियों के दिखने के बावजूद पोस्ट पर उनका मौजूद न होना , पोस्टों की संख्या , टिप्पणियों की संख्या , टिप्पणी उत्तर बॉक्स , आदि जाने कितनी ही कठिनाइयां महसूस की जा रही हैं । सबसे दुखद तो ये है कि पोस्ट के प्रकाशन के दो दो तीन तीन दिनों बाद भी पोस्ट पोर्टल पर कहीं भी नहीं दिखाई देती है । कृपया ध्यान दें और शीघ्र इसका निराकरण करने की कृपा करें । विवश होकर पोस्ट से इतर आप तक बात पहुंचाने के लिए यहां टिप्पणी करनी पड रही है ।

के द्वारा: ajaykumarjha ajaykumarjha

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के द्वारा: harirawat harirawat

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के द्वारा: pitamberthakwani pitamberthakwani

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संशोधन करें प्ले बॉय, पुरुष वेश्या,जिगोलो और गे अलग अलग कार्य करते हैं. अभिजात्य वर्ग की महिलायें भी पुरुषों की तरह पैसा खर्च कर पूरा यौन सुख लेती हैं कमोवेश जिन युवतियों को उनके पार्टनर पूर्णतः संतुष्ट नहीं कर पाते वो बेहिचक ज़िगेलो का प्रयोग करती हैं. पुरुष वेश्या पश्चिम का दुष्प्रभाव है इसका चलन बढ़ने का कारण है युवाओं में बढती यौन कुंठा है और गे समलैंगिक को कहते हैं. जब दो कथित पुरुष गे होते हैं तो उनमे से कम से कम एक का पूर्ण पुरुष होना नितांत आवश्यक है ऐसी स्थिति में देखा जाए तो महिलाओं के अधिकारों का घोर हनन हो रहा है. इस तरह के वाहियात विषयों पर निर्माता फिल्मे बनाकर संस्कृति को दूषित कर रहे हैं...नागेश खरे 'नागी' , बांदा 9415170115

के द्वारा: nagi nagi

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'Bold Scene' ! What does it mean? Can a person be said to be bold if he/she shows the courage to indulge into sex in public place? So first we should define the word 'bold'. If A philandarer man or a wanton woman can be said to be bold, then what about the dacoits who take so much of risk and display so much of courage - are they bold? As they are the legal criminals, these so-called "kalaakars' and 'adakaraas' doing such scenes are the social criminals. They will show how to kiss, they will show how to breast-feed, they will show how to undress, they will show how to make the sounds like 'issssss', 'aaaaaaah', the groans and the moans and time will come for them when they will show how to........... . Such scenes are not even sexy. They are just sensuous or we can say voluptuous with a tinge pf perversion. Their simple and often used logic is - Yeh toh public demand hai. I don't know how many people send the applications to the producers requesting them to offer such scenes. As in politics the voters have no option but to elect the 'kacharaa' because only 'Kooray ka dher' is available, it is in the cinema that the viewers have no option. However, I agree that the films with such unwanted, unnecessary, undesirable scenes do not grab the box office. But in the process they certainly do some damage to the society. Hamaray desh mein toh nangi honay ka elaan karnay wale log bhi celebrity ho jate hain. Equally responsible are the so-called social watchdogs. They will assault an innocent girl for wearing a jeans or moving without hijab, but they will get a ticket to view such 'bold scenes'. As a matter of fact when money rules and the objective of production is just profit and nothing else, this will continue to happen because the people producing such items are not common people, they are members of a different society. Indian will continue to produce such 'bold scenes', Bharat will continue to discuss this, Hindustan will continue to face the outcomes helplessly and Hindustanwaa will continue to be ignorant of the roots and the fruits. Film Censor Board, a legal entity has to control all this, who will control the Censor Board! Response has to come from the viewers, Reject such films if you wish.

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aakhir kaisa hai ye aarakshan ? jisme education koi mayne nahi rakhta, jisme aapki mehnat koi mayne nahi rakhti, jisme aapki lagan koi mayne nahi rakhti, jisme aapki prtibha (talent) koi mayne nahi rakhti, mayne rakhti hai to bas aapki jati (caste). yadi aap kisi job k liye application diye hai ya yadi kisi government college me admission k liye application diye hai aur aap forward class ke average ( not so intelligent) candidate hai to sure aapka selection nahi hone wala . kyonki aapka gunah ye hai ki aap backward class se belong nahi karte. yadi aap ka marks 80% hai to aapka selection nahi hoga kyonki ye seat 40% or 45% lane wale backward class se aane wale bandhuon ke liye reserved hai. Ek hi sath padhe-likhe , exams diye . achha markks aapka aaya pr select hoga wo bachha jo reserved category me aata hai.yaha pr aapki padhi nahi aapki jati mayne rakhti hai. government ko kadachit yah maloom nahi hai ki high class se aane wale student bhi garib hote hai. unke liye koi bhi aarakshan nahi hota . kaisa samvidhan hai ye ? hum kahte hai kaisa reservetion ????????????? Apko reservation dena hai to aap un garib (backward class) se belong karne wale candidate ko scholorship, education free of cost (fee) provide kijiye . Why u don't go for that ? instead of reservation in various fields. aakhir kaisa constitution hai yah ? government is bat ko tavajjo kyon nahi deti ? wo yah kah kr ignore ke deti hai ki 'these are rule of our constitution '.it's not a fair. but in my opinion we are responsible for that type of situation. and last but not least i request to government to take any action before reservation. Prakash g ki yah bahut hi achhi pahal hai pr dekhte hai sarkar tak yah pahuch pati hai ya nahi ?

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bita hua saal bitgaya sayed hum usko kuch yadon per views deysaktey hai filmo ko hit karan meie manta hoon sitraon ke upper hai per aaj tak log nahi samjh paaye iss ka hitfit/flop ka main hero story writter /dialoge writer aur sons writer hotey hain per inmeie se agar ek ne bhi dheel daal di to samjo film flop hum dabang ko hi leylene ki agar dekhi jaye to year 1965 ke samay ki story per banni yah film gaaney ke kaarand hit to hogayi per repeat value nahi rahegi ek kamjor story per banni yah film munni badnaam hyui ke karand business to dey gayi per hai kuch nahi akshay kumar kya karey ussney to khoob uchal khud kari director ne uska pasina khoon ki tarah bha diya per story ki koi roop rekha nahi phir gaaney bhi kaya kareinaur katerina to apni jawani9SHIELA) KE LIYE QURBAN KAR DI PER PUBLIC KO WOH PASAND NAHI GAANA TO PASAND PER JITNI SHEELA NAAM KI AURTEIEN /LADKIYA WOH BHADAKGAYI kya hero/heroine kareeiney jodi bann jatai hai per inkey sitaaarey jab aasman per hotey hain yah nichey nahi dekhtey aur phir yah muhh ki kha kar zameen per phir khada honey ki sochtey hain issi karand filmey flop ho jati hainek idea sir ji ka advertisement meie hit hai phir film hit hit ho ya flop unka yah idea get idea hai ravan ko unohney ram ka sahtru maan kaam karkara per flop inko yah idea nahi sirji ka idea achalaga riti\hik roshan to merey khyal se ek film ke baad jayada kamyabi nahi ley paaya jodhakabar ka nasha uttra hi nahishaid kapoor ko kareena hi deekh rahi hai kaya karega apne kaam ko dikhana kahin badiya kaam kara to naam roshan na hojey baap ki aashon per paani phir jayega baap jab sochata beta bada hokar naam roshan karega na rithik ne roshan kara na na shaid ne hit kara ab iss saal kuch karney ki kaamna hai

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badey pardey ko sabsey pahaley iss chhotey aprdey jab hi maat deney ki suuruat karithi jaHUMLOG aur BUNIYAD jaise srial ne apni kamyabi ke jhandegey gaad kar naam kamaya har aadmi ko iss chhoty pardeey(DURDARSHAN) ne apne karib karliya hum iss chhaey kitna hi t.v. ka naam dein per yeh wohi doordrah khali english aur hindi ka fark hai iss chotey pardey se ek eek naami actor banna s.r.k khan aaj jo hi hain woh isski bajah se hain iss chhotey pardey ke badey guund hai ramayan aur mahabhart ko duniya ne iss pardey se pachhna aur yeh choota parda bachho ka sada manornajan karta aya aaj bhi bachon ke liye chhoteynustad jaisa programme banna kar dikha raha hai. Ghar meie batthi mahioln ka manoranjan bhi yeh khub karta hai jinka samay pas nahi hota unko time pass ka saddhan milgaya patidev ki jo heb halki karney ki sochti ab unhey kahan time saas-bahu , aur kahanani ghar ghar ki ,jaise serial to famous huya kuch kalakar apne naamon ki vajaye in serialon meie miley kirdar ke naamon se parichit huye unko aaj bhi unhi naamo se jaan jata hai yeh chhota parda aaj ke badey pardey ko bhi sambhal rakhey huye uske aaney wali filmo ka isskey jariye khub pracha hota jub ki thodey samay ke baad dusra programme dikheny ki surruat karta jab ki iss pardey per chalney wale progrmme se badey pardey ko darr lga rahta hai jab koi achi film iss pardey aati hai tab bada parda sunsaan sa ho ja hoja hai . iss pardey ne badey pardey ke dubtey kalakaron ka bhvishay bhi uthha haai kuch to advertisement ke karan kuch serial ke sahrey kuch laugheter programme ke sahrey iss ko yaad rakhna harek ko hoga govt.ko bhi rahat mili desh ke naam karykarm jis meie karon ki public hoti this aur govt.ko uss publi surksha ke lieye kitna darr lagarahta hai aaj desh ki public uss programme ko ghar battey hi manorn leyti hai aur cricket dekhney waley premion ko to yah bahut hi bha gaya issley yeh bada parda banam duoordarsh duinya meie apni ek alg jagh banna chuka hai. dubtey sitrey jitnderji ko jeeney ke lye unki beti ke apne serial ne ek nahi raha dikhaye ,bachhan ji ko bhi issney raha dikhai aur bhi actor iss pardey per dubti nauo ko paar laga gaye unka ahem iss ne bachha liya isske saharey bahut se desh ko bachoon ka bahivsay irealty shows ke karand sudhar gaya unki kalo ko jab desh ki janta dekhti hai unko saharey janey badi badi companies film wale unko apney yahan jagah dey kaam deytey aur unka naam chamak utha hai iss chhotey pardi ki iss karmat se naa jaaney kitney eshwasiyon ka bahala ho jata hai isska naam duniya meie uncha horaha haiiss ke sharey desh ke bachhon ka jo bahvisy bannta hai govt.bhi rahat paati hai ghar ki mahilon ko bhi bahut si jaankar milti hai har roj koi nai vastu, naya prograame dekhney ko milta hai aaao isska dhanywad kareyein

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ashiwray amitabachan ki bahu hai yah baat nahi ki unke aisa karney hinudtanki sanskirti galat hogi yeh bhi nahi ki koworld fame horine ho baat hai ashiwrya hindustani hai hindu dahrm ko usney samjha hai tab usko cigrette pina galat hai woh t.v.bahut se progamme host karti aur bachonon ko sahi kaam karney ke liye kahati hain per kabhi ab bachono ko woh koi achi baat baateygi tab ky bachhey nahi kaheynegyey ki khud cigreeate piti haimey banna karr rahi isko pahaley khud sudhrna hoga agar yah sahi film se judey log kahetey hain ki usney cigrete nahi pi yah kewal ek seen jaisey rape ke seen meie rape nahi hota kewal adkari hoti per bachhey kya jaaney ash ne cigreate nahi pi woh kewal seen dey rahi vastav meie galat hai ek itni badi celebetrises asia seen dey kar kya batana chhaiti hai vasiey yah fil jab censor meie jayegi tab iss seen ko roka hi jayega kyunki hamrey desh ke kanoon meie ab iss per rok hai aur ab koi asia karta payajaeyga uss per jurmna hoga kay desh a har aadmi ash per jurmna lagaeyga agar lagta tab 500/- rs.per person se desh ke karoron logon ke hisaab se kya ash yeh zurmana bhar payegi , yayeh baat yahuni uchhal di gayi ho ki iski publicity kar do jab hohalla hoga tab seen kaat diyajayega issey kya fark katdogey agar film mey kuch nahin hoga to deyga kaun issliye acha hi ho ash ko apney upper lagney ke arop se pahley asia nahin karna chhaiye desh ke naami ghareney ki bahu badnam ho aur inkey parviar ko koi bhi programme host karney meie sharmm aaye asia film ko dekhney s phaley public apni priye heroine ko batta deien aap aisi hi rahey to achha rahey

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पलविंदर सिंह चीमा और दारा सिंह जैसे पहलवानों की तुलना खली से करना सूरज को मोमबत्ती दिखाने जैसा है, दारा सिंह खुद एक पेशेवर पहलवान थे और बिलकुल वैसी ही कुश्ती लड़ते थे जैसे खली खली लड़ते हैं बेशक दारा सिंह भी वर्ल्ड चैम्पियन बने मगर बहुत छोटे कुश्ती संघ के जिसका विश्वकुश्ती में कोई अहमियत नहीं थी और वो रुस्तमे हिंद कहे जाते हैं तो खली तो दुनिया के सबसे बड़े और मान्यता प्राप्त कुश्ती संघ डब्ल्यू,डब्ल्यू,ई के वर्ल्ड हयवीवेइट चैम्पियन बन चुके हैं जो बहुत बड़ी उपलब्धी है और रही बात पलमिंदर चीमा की तो वोह तो टुटपुंजिया पहलवान है और प्रोफेशनल रेसलिंग का मतलब ही नहीं जानता चीमा खली बना देगा तेरा कीमा हहहहः .

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पेशेवर पहलवानी में शोहरत तो है ही पैसा भी कम नहीं है आम तौर पर स्वतंत्र कुश्ती लड़ने वाले पहलवान यूरोप और अमेरीका में $४५००० से १००००० डॉलर तक कमा लेते हैं वहीँ टीएनऐ और डब्ल्यूडब्ल्यूई के मिडकार्ड रेसलर (दोयम दर्जे के पहेलवान) जैसे टीएनऐ के अब्ब्य्से, दनिअल,समोआ जोई, या डब्ल्यूडब्ल्यूई के कोफ़ी किंग्स्टन, ग्रेट खली,क्रिस्चन जैसे पहलवान ३५०००० से ८००००० डॉलर सालाना कमा लेते हैं जैसे खली ने २००८ में कुश्ती से १००४५०० डॉलर यानि साड़े चार करोड़ से भी ज्यादा रु कमाए थे और वोह हर साल तीन करोड़ तक कमा ही लेते हैं इसमें उनकी मर्चंदीस और फिल्मों की कमाई नहीं जोड़ी गयी है जो की तीन करोड़ तक हो सकती है, वहीँ डब्ल्यू डब्ल्यू ई के चोटी के उभरते सितारे जो आने वाले दिनों के मेगा स्टार्स हैं जैसे रेंडी ओर्टन, एज, रे मिस्टेरियो, वगैरह १५००००० से २०००००० सालाना कमा लेते हैं, वहीँ मेगास्टार्स जैसे हलक होगन, जोन सीना, बिग शो,कर्ट अंगेल, स्टिंग वगैरह तो सालाना ७०००००० तक कमा लेते हैं यह वोह कमाई है जो उनकी सिर्फ कुश्ती से होती है, सबसे ज्यादा कमाई करने वाले पहलवान हैं हलक होगन - सालाना कोई $ १५.५ मिलियन डॉलर. द रोक - सालाना कोई $ १२.५ मिलियन डॉलर जब वोह कुश्ती लड़ते थे. ब्रेट हार्ट- डब्लू,सी,डब्लू में ३०००००० सालरी थी. शान मैकल्स- कभी घोषित नहीं हुआ मगर कहा जाता है की जब ब्रेट हार्ट डब्लू डब्लू ई से चले गए तो डब्लू डब्लू ई की डूबती नैया बचाने के लिए विन्स मक्मोहन ने मैकल्स की सालरी डबल कर दी थी अनुमानित कोई ३ से ४ मिलियन डॉलर रही होगी क्यूंकि ९० के दशक में ब्रेट के बाद सबसे बड़े खिलाडी मैकल्स ही थे. ब्रोक्क लिसनर- २००१ से २००४ तक उनकी सालरी ९ मिलियन डॉलर थी. स्टोन कोल्ड स्टीव ऑस्टिन- अनुमानित ५ से ८ मिलियन डॉलर. रिक फलैर- ८० के दशक में १ मिलियन सालाना कमाई करने वाले पहले रेसलर बने. अंडरटेकर- ४ मिलियन. ट्रिपल एच- ४ मिलियन. कर्ट अंगेल- ३मिलिअन. बिग शो- १.५ मिलियन.

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डब्ल्यू डब्ल्यू ई दुनिया के सबसे मशहूर स्ताडियम जैसे मेडिसन स्क्वाएर गार्डेन, सिल्वरडोम, विम्बली स्ताडियम, फेनिक्स स्ताडियम, जैसी जगहों पर होता है और इस तरह का स्ताडियम दर्शकों से खचाखच भरा रहे यह सिर्फ डब्ल्यू डब्ल्यू ई में ही देखने को मिलता है वरना फूटबाल और बोक्सिंग जैसे खेल भी कभी ही कभी इन स्ताडियम को भर पाते हैं, ८० हज़ार से एक लाख दर्शकों के सामने इतने बढ़िया स्टंट द्रश्य दिखाना और महानतम कुश्ती का प्रदर्शन करना कोई मामूली बात नहीं है इसी लिए इन पेशेवर पहलवानों को इतनी प्रस्सिधी और पैसा मिलता है भारतीय पहलवानों को भी यह बात समझनी चाहिए की वो पेशेवर कुश्ती की खुन्नस करने की जगह इसे समझें और आने वाले दिनों में हमें खली जैसा स्टार तो मिले ही मगर शान माइकल, ब्रेट हार्ट, हलक होगन जैसे मेगास्टार भी भारत से ही पैदा हों,

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डब्ल्यू डब्ल्यू ई की पेशेवर कुश्तियां जितनी मशहूर हैं उतना ही लोगों के बीच यह बहस भी है की यह फाइट असली है या नकली हाल में भारत के वर्तमान में एक मात्र पेशेवर पहेलवान दलीप सिंह राणा ( ग्रेट खली ) जब भारत आये तो पूरे भारत में उनका ज़ोरदार स्वागत हुआ शाहरूख खान, अक्षय कुमार, से लेकर सोनिया गांधी और सचिन तेंदुलकर तक उनसे मिलने के लिए बेताब दिखे वहीँ बहुत दुःख हुआ की एक समय में पेशेवर कुश्ती की दुनिया में भारत का गौरव बढाने वाले पहलवान दारा सिंह और कई अन्य पहलवानों ने खली को नकली पहलवान बताया दारा सिंह यह भूल गए की वोह भी उसी तरह की कुश्ती लड़ते थे जैसा की खली लड़ते हैं खैर इन बातों से खली की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा और उन्होंने इन सारे टुटपुंजिया पहलवानों को यह कहा की इस तरह के लोग अपने बाप को बाप ही नहीं मानते और जिसे मेरी कुश्ती पर शक है वोह मेरे साथ चले और देखे की यह सारी कुश्तियां असली है या नकली, आप की अदालत में भी खली ने रजत शर्मा के उनकी कुश्ती पर सवालिया निशान लगाने पर उनका जवाब था की जो कुछ भी आप टी वी पर देखते है वह बिलकुल सच है अगर यह झूट होता तो जो हजारों लोग स्टादियम में यह कुश्ती देखने आते हैं वोह तो उठ कर चले जायेंगे और रजत शर्मा के पास इसका कोई जवाब नहीं था, अब सवाल यह पैदा होता है की आखिर जब भारत की सबसे बड़ी हस्तियाँ खली का स्वागत कर रहे थे तो दारा सिंह और कुछ चड्ढी पहन कर अंतर्राष्ट्रीय कुश्ती के असफल पहलवान उनकी कमी क्यूँ निकाल रहे थे इसका जवाब है उनकी खली के प्रति इर्ष्या उन्हें एसा लगा की हम असली कुश्ती लड़ते है और हमें कोई जानता नहीं वहीँ और यह नूर कुश्ती लड़ने वाला इतनी दौलत और प्रसिद्धी बटोर रहा है मगर वह यह भूल गए की जिस तरह की कुश्ती खली लड़ते है वह नाटक सही मगर यह नाटक भी जिस तरह की देसी कुश्ती वोह लड़ते है उससे कहीं ज्यादा मुश्किल और खतरनाक है और इसी लिए खली न सिर्फ भारत बल्कि सारी दुनिया में पहचाना जाता है, रही बात दारा सिंह की तो वोह भी खली से जलने वालों में शुमार हो गए और यह भूल गए की जिस पेशेवर कुश्ती की वजह से वोह सिनेस्टार बने वोह वोह उसे ही ग़लत कह रहे हैं दारा सिंह का खली से जलना इस लिए भी लाज़मी था की जिस खेल के वोह बहुत छोटे से खिलाडी थे मगर उसी के बूते भारत में उन्हें भरपूर प्यार मिला खली उसी खेल के विश्व चैम्पियन हैं और उनकी लोकप्रियता सारी दुनिया में है वहां भी जहाँ दारा सिंह तो दूर अमिताभ और सचिन तेंदुलकर को भी लोग नहीं जानते हमें इसे महान खली को इज्ज़त देनी चाहिए न की उसपर छीटाकशी करनी चाहिए.

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पेशेवर कुश्ती में कुछ पहलवान ऐसे है जो मेगा स्टार की श्रेणी में आते है उनमे से कुछ ऐसे भी है जिनका कुश्ती दिखाने का कौशल बहुत ख़ास नहीं था मगर फिर भी उन्होंने ऐसी ख्याति और दौलत इस खेल से कमाई की जिसके आगे एन ऍफ़ एल , एन बी ऐ और हौलीवुड स्टार्स की चमक भी धुंदली पड़ जाए इस श्रेणी में प्रमुख नाम इस प्रकार हैं - हलक होगन, दा रोक, स्टोन कोल्ड, अंदरे दा जायंट, द़ा वारीअर, जोंन सीना, बतिस्ता, गोल्डबर्ग वगैरह इन पहलवानों को कुश्ती के अलावा फिल्मों और टी वी में आने की वजह से भी बहुत ख्याति मिली इन्होने अपने खेल से ज्यादा अपने हावभाव नाटकबजी और हष्टपुष्ट शरीर की वजह से ख्याति प्राप्त की, वहीँ बहुत से ऐसे पहलवान भी है जिनका कुश्ती दिखाने का कौशल इन मेगास्टार्स से कहीं बेहतर था मगर वह इतने लोकप्रिय नहीं हो सके जैसे जेफ्फ हार्डी, जेफ्फ जरेट्स, कर्ट हेनिंग, रिक मार्टिल, एक्स पैक, मर्री जिनाती, एड्डी गुर्रेर्रा, क्रिस बेनोइट, क्रिस जेरिको वगैरह, और अब मई आप को उन महान पहलवानों का नाम बता रहा हूँ जिनकी वजह से पेशेवर कुश्ती का महान खेल सारी दुनिया में जाना जाता है यह है रियल प्रोफेशनल रेस्लार्स जिनकी कुश्तियां देखने के लिए अखाड़े भरते है और यह सिर्फ खालिस कुश्ती का प्रदर्शन करते है इनमे सबसे पहले दो नाम आते है जिनमे से पहला नंबर किसे दूँ यह मैं अभी तक समझ नहीं पाया हूँ मगर यकीन करें अगर आप इन दोनों मेगा स्टार्स के ९० के दशक के खेल देखेंगे तो आप भी इसका फैसला नहीं कर पाएंगे की इन दोनों में नंबर वन कौन है इनके नाम है ब्रेट दा हिट मेंन हार्ट (ब्रेट हार्ट) और शान माइकल (एच,बी,के,) इसमें कोई संदेह नहीं है की अगर यह पहलवान न होते तो डब्लू डब्लू ई इतने आगे न आ पता जितना की आज है, इनके अलावा जो मेगास्टार्स अपने खेल की वजह से आगे बढे उनमे ट्रिपल एच, कर्ट एंगेल, माचो मैन, रिकी स्टीमबोथ, जिम स्नूका, स्कोट हॉल, केविन नाश, रिक फ्लैयर, रोडी पाइपर, अंडरटेकर,स्टिंग वगैरह है.

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जोस शान से और आन से इंडियन इदोल खेला गया बहुत ही बढ़िया रहा, सोनी एन्तेर्तैन्त्मेंट ने जो यह आज नव्युगों के लिए अपना पर्फोर्मांस पासे करके भविष्य का आन्द्धर मित्त्नी का रास्ता दिखाया है यह बहुत ही बढ़िया बचूं की हिम्मत बदती, जैसे श्री राम, भूमि, र्रकेश्मैनी ने इनसो आगे रख कर अपने सपनो को साकार करने का बहर्सक प्रयास करते फिनाल तक आगे आये और श्रीराम ने सबसे आगीय बदकार इन्दिआनिदोल का ख़िताब जीतकर अपना नाम तो रोशंकारा ही साथ मे माँ-बाप की आशाओं को पूरा कर दिया औरर पूरे हिन्दुअत मे अपनर नासं का झंडा खरा अपने गुरु का नाम ऊँचा करा यह भी कोई कम बात नहीं हैऔर सब से बड़ी बात हाई दुनिया के नामीगिरामी देश की महँ हस्ति ने इनको बतया आगे बदने से कभी मत डरा और उनको यह ख़िताब और विन्नेर की प्रिजे आपने शुभ्हाथों से दोइया जो कभी सोचा न हो पूरा हो जाये उसको यह खुसी मिली और उसने देश और नव्युगों को जगाया की भविष्य बनने का साही मार्ग येही है हिम्मत और होसले को जरिया बन्नाकर अपने और आपने माँ-बाप का नाम रोशन कर्रो यह बेटे का स्साही कर्तव्य hai

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के द्वारा: seema singh seema singh

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