blogid : 319 postid : 624345

किशोर कुमार: मेरा जीवन कोरा कागज कोरा ही रह गया

Posted On: 13 Oct, 2013 मस्ती मालगाड़ी में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

दुनिया की भीड़ में अपनी मेहनत से अपना मुकाम बना पाना सरल कार्य नहीं पर किशोर कुमार ने जिंदगी की जंग में अपने कठोर परिश्रम से विजय हासिल की. किशोर कुमार ने हिन्दी सिनेमा की गायिकी में अपना ऐसा मुकाम बनाया जिसे भुला पाना आज भी आसान नहीं है. इसके बावजूद भी किशोर कुमार की जिंदगी ‘कोरा कागज’ के उस गीत जैसी लगती है जिसे स्वयं उन्होंने गाया था. गीत के बोल कुछ इस तरह थे:


मेरा जीवन कोरा कागज कोरा ही रह गया

जो लिखा था, आंसुओं के संग बह गया

एक हवा का झोंका आया, टूटा डाली से फूल

ना पवन की, ना चमन की, किस की है ये भूल

खो गयी खुशबू हवा में, कुछ ना रह गया

उड़ते पंछी का ठिकाना, मेरा न कोई जहां

ना डगर है, ना खबर है, जाना है मुझको कहां

बन के सपना, हमसफर का साथ रह गया

मेरा जीवन कोरा कागज कोरा ही रह गया


ना जाने कौन सा जादू था उनकी प्रेम कहानी में


इस गीत के बोल याद दिलाते हैं किशोर कुमार की निजी जिंदगी के उस दुख की जब चार शादियां करने के बावजूद भी उनकी जिंदगी में प्यार की कमी रही. जिंदगी के हर क्षेत्र में मस्तमौला रहने वाले किशोर कुमार के लिए उनकी लव लाइफ भी बड़ी अनोखी थी. प्यार, गम और जुदाई से भरी उनकी जिंदगी में चार पत्नियां आईं. किशोर कुमार की पहली शादी रूमा देवी से हुई थी, लेकिन जल्दी ही शादी टूट गई. इसके बाद उन्होंने मधुबाला के साथ विवाह किया. लेकिन शादी के नौ साल बाद ही मधुबाला की मौत के साथ यह शादी भी टूट गई. साल 1976 में किशोर कुमार ने अभिनेत्री योगिता बाली से शादी की लेकिन यह शादी भी ज्यादा नहीं चल पाई. इसके बाद साल 1980 में उन्होंने चौथी और आखिरी शादी लीना चंद्रावरकर से की जो उम्र में उनके बेटे अमित से दो साल बड़ी थीं.


किशोर कुमार की निजी जिंदगी में दुखों का सिलसिला कुछ इस कदर ही चलता रहा और एक दिन 13 अक्टूबर साल 1987 को दिल का दौरा पड़ने के कारण उनकी मौत हो गई. आज 13 अक्टूबर, 2013 है और हम किशोर कुमार की उन सभी बातों को याद करेंगे जिन्होंने उन्हें ‘किशोर कुमार’ बनाया.


  • मध्यप्रदेश के खंडवा शहर में 4 अगस्त, 1929 को एक मध्यमवर्गीय बंगाली परिवार में किशोर कुमार का जन्म हुआ.
  • किशोर कुमार ने हिन्दी सिनेमा के तीन नायकों को महानायक का दर्जा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की. उनकी आवाज के जादू से देवआनंद सदाबहार हीरो कहलाए और राजेश खन्ना को सुपर सितारा कहा जाने लगा. किशोर कुमार की आवाज के कारण ही अमिताभ बच्चन महानायक बने.
  • साल 1960 में किशोर कुमार और मधुबाला ने शादी कर ली जिसके लिए किशोर कुमार ने अपना नाम बदलकर इस्लामिक नाम “करीम अब्दुल” रख लिया था.
  • फिल्म ‘महलों के ख्वाब’ ने मधुबाला और किशोर कुमार को पास लाने में अहम भूमिका निभाई.
  • मध्य प्रदेश के खंडवा में 18 साल तक रहने के बाद किशोर कुमार को उनके बड़े भाई अशोक कुमार ने मुंबई बुला लिया.
  • किशोर कुमार यूं तो अशोक कुमार यानि दादामुनी के भाई थे जो हिन्दी सिनेमा में किशोर कुमार से पहले स्थापित थे लेकिन फिल्मों में काम के लिए किशोर कुमार ने खुद मेहनत की.
  • साल 1969 में निर्माता निर्देशक शक्ति सामंत की फिल्म आराधना के जरिए किशोर गायकी के दुनिया के बेताज बादशाह बने. इस फिल्म में किशोर कुमार ने ‘मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू’ और ‘रूप तेरा मस्ताना’ जैसे गाने गाए.

लता दी को क्यों था शादी से परहेज ?

मोहब्बत की और उसमें मिले दर्द का इजहार सरेआम किया



Tags:                 

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran