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ना मतलब केवल ‘ना’ है

Posted On: 6 Jan, 2014 मस्ती मालगाड़ी में

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जिंदगी में सोच-समझकर फैसले लेने वाले बहुत कम लोग होते हैं और उनमें भी वो लोग ना के बराबर होते हैं जो अपने द्वारा लिए गए फैसलों पर अटल रहते हैं. ए.आर. रहमान का नाम भी उन्हीं में से एक है.रॉयल्टी के अधिकार की मांग के चलते हुए संगीतकार ए.आर.रहमान ने आमिर खान की फिल्म ‘तारे जमीन पर’ में संगीत देने से मना कर दिया था और अपने इस फैसले पर वो अटल रहे. हारकर आमिर खान ने यह मौका शंकर एहसान लॉय को दिया जिसके गीत को प्रसून जोशी ने लिखा. 6 जनवरी को ए.आर. रहमान का 48वां जन्मदिन है. इसके मद्देनजर युवा सामाजिक संगठन “रेनड्राप्स इसाइ” ए.आर. रहमान के जन्मदिन वाले दिन ही उनको ईसाई तमिझा अवार्ड से सम्मानित करेगा.


ए.आर. रहमान आज वह नाम बन चुके हैं जो दुनियाभर में भारतीय संगीत का झंडा लिए अगुवाई कर रहे हैं. ए आर रहमान का पूरा नाम अल्लाह रक्खा रहमान है. रहमान को संगीत अपने पिता से विरासत में मिला था. उनके पिता आरके शेखर मलयाली फ़िल्मों में संगीत देते थे. आज सफलता के शिखर पर बैठे ए आर रहमान की बचपन की कहानी सुन किसी के भी आंखों में पानी आ जाए. रहमान जब मात्र 9 साल के थे तब ही उनके पिता का देहांत हो गया और उनके घर में आर्थिक तंगी आ गई. किसी तरह संगीत के वाद्य यंत्र किराए पे देकर गुजर-बसर किया. हालात इतने बिगड़ गए कि उनके परिवार को इस्लाम अपनाना पड़ा. 70 के दशक में रहमान ने इस्लाम धर्म ग्रहण किया.

A R Rehman’s Profile :मजबूरी में स्वीकारा था इस्लाम


a.r.rahmanरहमान ने संगीत की आरंभिक शिक्षा मास्टर धनराज से प्राप्त की और मात्र 11 वर्ष की उम्र में अपने बचपन के मित्र शिवमणि के साथ रहमान बैंड रुट्स के लिए की-बोर्ड (सिंथेसाइजर) बजाने का कार्य करते रहे. वे इलियाराजा के बैंड के लिए काम करते थे. 1991 में पहली बार रहमान ने गाना रिकॉर्ड करना शुरु किया. 1991 में रहमान ने घर के पिछवाड़े में अपना स्टूडियो शुरू किया. शुरुआत में उन्होंने विज्ञापनों और डॉक्यूमेंट्री फिल्मों में संगीत दिया. हिन्दी फिल्मों के लिए उन्होंने 1992 में पहली बार फिल्म रोजा के लिए संगीत दिया था. अपनी पहली हिन्दी फिल्म “रोजा” के गीतों से ही रहमान ने ऐसा जादू बिखेरा जो आज भी कायम है. फिल्म रोजा के संगीत को टाइम्स पत्रिका ने टॉप टेन मूवी साउंडट्रेक ऑफ ऑल टाइम इन 2005 में जगह दी. उसके बाद देश की आजादी की 50 वीं वर्षगाँठ पर 1997 में “वंदे मातरम” एलबम बनाया, जो जबरदस्त सफल रहा था. उन्होंने जाने-माने कोरियोग्राफर प्रभुदेवा और शोभना के साथ मिलकर तमिल सिनेमा के डांसरों का ग्रुप बनाया, जिसने माइकल जैक्सन के साथ मिलकर स्टेज कार्यक्रम दिए.

एक दिन सपनों का राही, चला जाए सपनों से आगे


अगर आज तक के रहमान के अवार्डों पर नजर डालें तो लगेगा जैसे रहमान कोई अवार्ड पुरुष हैं. रहमान को अब तक सर्वाधिक 14 फिल्मफेयर अवार्ड, 11 फिल्मफेयर अवार्ड साउथ, चार राष्ट्रीय पुरस्कार, दो अकादमी, दो ग्रेमी अवार्ड और एक गोल्डन ग्लोब अवार्ड मिला है. उनके स्लमडॉग मिलेनियर के गाने “जय हो” के लिए तो उन्हें ऑस्कर पुरस्कार से भी नवाजा गया था. और इन सब के साथ रहमान को साल 2000 में पद्मश्री और 2010 में पद्म विभूषण से भी नवाजा गया है.


एक बेहतरीन संगीतकार होने के साथ रहमान एक आदर्श पुरुष भी हैं जो इतनी सफलता के बाद भी हमेशा नम्र रहते हैं. उनकी निजी जिंदगी कभी भी सवालों या विवादों के घेरे में नहीं आई. आज जहां हर संगीतकार पर चोरी का आरोप लगना आम बात है वहीं ऐसा कोई नहीं है जो रहमान के गानों को चोरी किया या गलत बताए. भारत का यह सुर सम्राट आज विदेशों में भी अपनी आवाज और संगीत को पहचान दिला रहा है.


गीतों का जादूगर

प्यार हो या फिर दोस्ती बस ‘देव’ सुनना पसंद था

“पैसा मत ले मैडम से, भाभी है तुम्हारी”



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