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दिल आखिर तू क्यूं रोता है

Posted On: 9 Jan, 2014 मस्ती मालगाड़ी में

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जब-जब दर्द का बादल छाया

जब गम का साया लहराया

जब आंसू पलकों तक अया

जब ये तन्हां दिल घबराया

हमने दिल को ये समझाया

दिल आखिर तू क्यों रोता है….


farhan akhtarजावेद अख्तर द्वारा लिखी गई इन पंक्तियों को जब फरहान अख्तर फिल्म ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ में अपनी आवाज में बोलते हैं तो उन दर्शकों के लिए जो फिल्म को देख रहे होते हैं, समां बदल सा जाता है. फरहान अख्तर को अभिनेता, लेखक, निर्माता, गायक या फिर निर्देशक कोई भी नाम देना उनकी कला को परिभाषित करने लिए उचित नहीं होगा.


फरहान एक दमदार आवाज, सभी विधाओं में पारंगत और अभिनय से लेकर एक निर्देशक के रूप में कला का ऐसा संग्रह हैं जिन्हें देख यह कहना गलत नहीं लगता कि फरहान अख्तर, मशहूर लेखक जावेद अख्तर के बेटे हैं. जब फिल्म ‘भाग मिल्खा भाग’ को सफलता प्राप्त हुई तो ऐसा कहा जाने लगा कि फरहान अख्तर पर भी फिल्म निर्देशित की जानी चाहिए पर जब कभी भी फरहान से इस बारे में सवाल किया जाता तो वो चुप रहना ज्यादा बेहतर समझते.

फरहान अख्तर – प्रतिभा का मेल


farhan akhtar movieफरहान अख्तर का 9 जनवरी को जन्मदिन है और इस सिलसिले में उन फिल्मों का जिक्र करना जरूरी है जिसमें फरहान एक निर्माता, अभिनेता, निर्देशक या फिर गायक के रूप में उभरकर दर्शकों के सामने आए. फरहान अख्तर फिल्म ‘दिल चाहता है’, ‘डॉन’, ‘लक्ष्य’, ‘डॉन 2’, ‘डॉन 3’ जैसी तमाम फिल्मों के निर्देशक और लेखक रहें. निर्माता के रूप में उन्होंने ‘डॉन’, ‘कार्तिक कॉलिंग कार्तिक’, ‘रॉक ऑन’, ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’, ‘तलाश’ और फुकरे जैसी फिल्में हिन्दी सिनेमा को दीं.


‘रॉक ऑन’ और ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ इन दोनों फिल्मों में फरहान अख्तर ने एक अभिनेता की भूमिका भी निभाई. इन्हीं दोनों फिल्मों में फरहान अख्तर एक गायक के रूप में भी दर्शकों के सामने आए. ‘दिल चाहता है’, रॉक ऑन’ और ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ इन सभी फिल्मों के लिए फरहान अख्तर को तमाम तरह के अवार्ड्स से सम्मानित किया गया. साल 2014 में फरहान अख्तर, विद्या बालन के साथ फिल्म ‘शादी के साइड इफेक्ट’ फिल्म में नजर आएंगे. कुछ पक्तियां जिन्हें जावेद अख्तर ने लिखा और आवाज फरहान अख्तर ने दी उन पंक्तियों को फरहान अख्तर के जन्मदिन के मौके पर याद करना शायद उनकी कला की तारीफ को शब्द देने के लिए कम होगा:


दिलों में तुम अपनी बेताबियां लेकर चल रहे हो तो जिंदा हो तुम

नज़र की ख्वाबों में बिजलियां लेकर चल रहे हो तो जिंदा हो तुम

हवा के झोंकों के जैसा आजाद रहना सीखो

तुम एक दरिया के जैसे लहरों में बहना सीखो….


बस यह एक हसीना ही सब की पसंद है !!

अब क्यों चुप हैं शबाना ?

मौत का रहस्य और आवारागर्दी का मुकाबला नहीं !




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