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किसने सोचा था कि ऐसी भी शादी होगी !!

Posted On: 4 Feb, 2014 मस्ती मालगाड़ी में

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ऐसी जीवन संगिनी कौन नहीं चाहता है जो आपकी जिंदगी के हर मोड़ पर आपका साथ दे सके. जब प्यार किया तब जानते नहीं थे कि शादी करने का फैसला भी बहुत जल्द ही करना पड़ेगा. ऐसी कहावत है कि जब शादी करने का फैसला जल्दबाजी में किया जाता है तो वो शादी ज्यादा लंबे समय तक सफल नहीं हो पाती है पर इनके साथ तो कुछ अलग ही हुआ. एक ऐसी प्रेम कहानी जिसे देखकर लोगों ने कभी इस बात की कल्पना भी नहीं की थी कि यह जोड़ी कई सालों तक एक-दूसरे का साथ निभा पाएगी. यहां बात हो रही है अमिताभ बच्चन और जया बच्चन की जोड़ी की.


उम्र 13 वर्ष के आस-पास ही रही होगी जब जया भादुड़ी भोपाल के एक कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ती थीं. उसी समय की बात है जब वो दुर्गापूजा की छुट्टियों में कोलकाता गईं और वहां उनकी मुलाकात निर्देशक सत्यजीत राय से हुई थी. जया से मुलाकात के बाद सत्यजीत राय ने उन्हें फिल्म महानगर में बहन का किरदार निभाने के लिए कहा और जया झिझकते-शर्माते इस फिल्म की शूटिंग में पहुंच गईं. बाद में उन्होंने फिल्म इंस्टीट्यूट से एक्टिंग का डिप्लोमा लिया और गोल्ड मेडल जीतने के बाद फिल्म गुड्डी के लिए चुन ली गईं. जया को क्या पता था कि इस गुड्डी फिल्म के कारण उन्हें अपना सपनों का राजकुमार मिलेगा. सात हिंदुस्तानी से अपना कॅरियर शुरू करने वाले अमिताभ बच्चन पहली बार जया बच्चन से गुड्डी के सेट पर ही मिले थे. उन्हें यह फिल्म तो नहीं मिली, लेकिन जया से उनका परिचय जरूर हो गया था. अमिताभ और जया बच्चन के मिलन की शुरुआत हो गई और वो जया से मिलने उनके फिल्म इंस्टीट्यूट के कन्वोकेशन में भी जा पहुंचे. यह जोड़ी पहली बार फिल्म बंसी बिरजू में एक साथ नजर आई. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही थी. इसके बाद दोनों फिल्म अभिमान में एक साथ नजर आए. यह फिल्म फ्लॉप तो नहीं हुई पर कुछ खास कमाई भी नहीं कर पाई थी. अमिताभ बच्चन की सत्रहवीं फिल्म जंजीर काफी सुपरहिट रही जिसमें अमिताभ के साथ जया बच्चन की जोड़ी थी. इस फिल्म के बाद अखबारों में अमिताभ और जया की प्रेम लीलाओं के चर्चे होने लगे. साल 1973 में जया के पिता के पास अमिताभ का फोन आया और उन्होंने कहा कि आप मुंबई आकर अपनी बेटी से मिल लें. तब जाकर जया ने अपने दिल की बात अपने पिता को बताई. कवि हरिवंश राय बच्चन के पुत्र अमिताभ व्यवहार में विनम्र  थे. यही बात जया के पिता को प्रभावित कर गई और उन्होंने दोनों के रिश्ते के लिए ‘हां’ कर दी.

जब 33 साल बाद मुस्कुराए अमिताभ


Amitabh bachchanअमिताभ और जया बच्चन शादी करने के लिए तैयार नहीं थे. वो कुछ समय तक अपने फिल्मी कॅरियर पर ध्यान देना चाहते थे. पिछले साल जब अमिताभ और जया बच्चन ने अपनी 39 सालगिरह मनाई तो अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग पर लिखा था किफिल्‍म जंजीरको रिलीज हुए ज्यादा दिन नहीं हुए थे. हमने फैसला किया था कि अगर यह फिल्म सफल रही तो हम दोस्तों के साथ इसका जश्न लंदन में मनाएंगे लेकिन हमारा यह फैसला पिताजी को मंजूर नहीं था. उनका कहना था कि शादी करके ही मैं जया के साथ लंदन जाऊं. हमें यह फैसला मानना पड़ा.


अमिताभ की बारात में पिता सहित केवल पांच लोग आए थे. इनमें फिल्मी कॅरियर से जुड़े केवल केवल गुलजार थे. वधू की ओर से माता-पिता और बहनों के अलावा, अभिनेता असरानी और फरीदा जलाल बारात में आए थे. अमिताभ-जया की शादी में राजीव गांधी और संजय गांधी भी शरीक हुए थे. शादी के तुरंत बाद अमिताभ-जया हनीमून मनाने लंदन चले गए. यह इन दोनों की पहली विदेश यात्रा थी. जया बच्चन ने कभी भी रेखा या अन्य किसी अभिनेत्री को लेकर अमिताभ बच्चन पर शक नहीं किया. जया ने अपनी शादी का आधार ‘विश्वास’ को बनाए रखा जिस कारण हर मुश्किल घड़ी में भी वो एक-दूसरे के साथ खड़े रहे. शादी के बाद भी जया फिल्में करती रहीं. ‘शोले’ फिल्म के दौरान जया मां बनने वाली थीं और इस ‌फिल्म के रिलीज होने के बाद जया ने श्‍वेता को जन्म दिया. मां बनने के बाद जया कुछ समय फिल्मों से दूर रहीं. अभिषेक के होने के बाद जया धीरे-धीरे करके फिल्मों से दूर होती गईं. जया का फिल्मों से दूर रहने का फैसला बच्चन परिवार का सामूहिक फैसला था. 17 साल बाद वह ‘हजार चौरासी की मां’ फिल्‍म में नजर आईं. यह एक तरह से उनकी दूसरी फिल्मी पारी थी. इसके बाद जया ने ‘फिजा’, ‘कभी खुशी कभी गम’, ‘कोई मेरे दिल से पूछे’, ‘द्रोण’ और ‘लागा चुनरी में दाग’ जैसी कई फिल्में की. अमिताभ बच्चन ने कभी भी जया को अपने फैसले मानने के लिए मजबूर नहीं किया.


तारीफों का सिलसिला जारी है….

ना मतलब केवल ‘ना’ है

जब दिलवर ही अपना नहीं रहा तो…

Web Title : amitabh bachchan and jaya bachchan



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KULDIP BASKANDI के द्वारा
February 6, 2014

सपनो की तलास मे हम तो चले थे अपनो को कही दूर छोड़कर्. मगर इतने आगे निकल् चले है कि जाने किन किन रास्तो से होकर. मिला बस इतना ही है कि हम सिर्फ एक शाम निकाल सकते है उसे पाकर. मन मे बारबार एक ही खयाल आता हे कि क्या यही सपना था मेरा सब कुछ खोकर. न संभाल पाया हु मॅ,अपने सब रिस्तो को एक इंसान होकर, ये सितारे,पानी,पेड़,सूरज,धरती, भी निभाते हे अपना फर्ज निर्जीव होकर. अब जागी हे मेरी चेतना, दुनिया के थपेड़ो को खाकर, रखूंगा मे संभाल कर हर रिस्ते को,अपने सपनो मे एक नेक इनसान बन कर. कुलदीप बासकँदी 9717653134


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