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रोचक बातें: गुलजार केवल सफेद कपड़े ही क्यों पहनते हैं?

Posted On: 18 Aug, 2015 में

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किताबें झांकती हैं बंद अलमारी के शीशों से

बड़ी हसरत से तकती हैं

महीनों अब मुलाकातें नहीं होती

जो शामें इनकी सोहबतों में कटा करती थीं, अब अक्सर

गुज़र जाती हैं ‘कम्प्यूटर’ के पर्दों पर

बड़ी बेचैन रहती हैं किताबें…

इन्हें अब नींद में चलने की आदत हो गई हैं,

ये शब्द उस महान फनकार के हैं जिसने अपनी कलम से सारी कायनात को गुलजार कर दिया. दशकों से भारतीय फिल्म उद्द्योग को पटकथा, कविता, संवाद और गीत देने वाले सम्पूर्ण सिंह कालरा उर्फ गुलजार का आज जन्मदिन है. वह 81 साल के हो गए हैं. आइए गुलजार के जीवन से संबंधित कुछ बाते जानने की कोशिश करते हैं.


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गुलजार केवल सफेद कपड़े क्यों पहनते हैं: कॉलेज के दिनों से ही गुलजार साहब को सफेद रंग से प्यार था. क्या हो पार्टी, क्या हो अवार्ड शो वह हर जगह सफेद कपड़ो को ही तरजीह देते हैं. एक समय ऐसा था जब वह कुर्ता और पजामा तक सीमित नहीं थे बल्कि धोती और टी-शर्ट भी पहना करते थे. एक सवाल के जवाब में जब गुलजार से पूछा गया कि आप सफेद कुर्ता-पजामा क्यों पहनते हैं उनका जवाब था पहले उनके पास सफेद कपड़ों का दो सेट था और हर दिन एक को धोते थे और दूसरे को पहनते थे. फिल्म ‘खुशबू’ में जिंतेंद्र का चरित्र भी हूबहू गुलजार की तरह दिखाने की कोशिश की गई थी.


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गैराज में काम किया: दादा साहब फाल्के से पुरस्कृत गुलजार जब खालसा कॉलेज में पढ़ते थे उस दौरान पार्ट टाइम जॉब के रूप में मोटर गैराज में काम करते थे जहां उन्हें गाड़ियों को रंगने का काम दिया गया था. खाली समय में वे कविताएं भी लिखते थे. यहीं से उन्हें हिंदी सिनेमा में गीत और संवाद लिखने का मौका मिला.

किताबों से प्यार: गुलजार का परिवार चाहता था कि वे नौकरी करते रहें. उनके परिवार का मानना था कि एक लेखक ज्यादा कमाकर नहीं दे सकता. लेकिन उन्हें किताबों से प्रेम था. उनका यही प्रेम उन्हें लेखनी के लिए प्रेरित करता था. अपने इस क्षेत्र में जगह बनाने के लिए उन्होंने काफी संघर्ष भी किया है.

एक मोड़: एक समय था जब गुलजार जासूसी उपन्यासों के आदी हो चुके थे. तब उन्होंने महान लेखक रबीन्द्रनाथ टैगोर की उपन्यास ‘दि गार्डनर’ पढ़ी. जिसके बाद उनका झुकाव एक अलग तरह की लेखनी की ओर होने लगा. गुलजार की माने तो उनकी इस किताब ने उनके जीवन को ही बदल दिया.

कैसे लेखक बनें: गुलजार की माने तो “एक लेखक रातोरात पैदा नहीं लेता. उनके मुताबिक यह एक लंबी प्रक्रिया है और जीवन के छोटे-छोटे क्षण हमेशा हमे इस ओर धक्का देते हैं”. हर किसी के जीवन में वह समय आता है जब वह इसी तरह के धक्के की तलाश करता है.

बंगाल प्रेमी: ढेरों फिल्मफेयर और राष्ट्रीय पुरस्कार जितने वाले गुलजार साहब को न केवल बंगाली पहनावा पसंद है बल्कि उन्हें बंगाल का हर चीज पसंद है. वह बंगाली भाषा को धाराप्रवाह के साथ बोलते भी हैं…..Next

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